मनोविज्ञान का अर्थ एवं परिभाषा

परिचय 

जब पहली बार लोगों का  सामना मोविज्ञान विषय से होता है  तो अक्सर लोगों के मन में यही विचार आता है की इस विषय के द्वारा मैं दूसरों  के मन को जान सकता हूँ या दुसरे के विचारों को जान सकता हूँ परन्तुं कुछ लोग इसके हटकर यह भी बताते है की इसके द्वारा मैं स्वयं को जान सकता हूँ , दूसरों को जान सकता हूँ  अथवा विशेष प्रतिक्रियाएँ; जैसे- लोग गुस्सा क्यों होते हैं ,स्वप्न क्यों देखते हैं, लोग क्यों दूसरों की सहायता करते हैं अथवा दूसरों  के साथ दुर्व्यवहार करते हैं आदि बातें भी जान सकते हैं 

मनोविज्ञान में मनोवैज्ञानिक,  मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों का भी अध्ययन करते हैं। व्यवहार को प्रेरित करने वाले कारकों को बेहतर ढंग से समझने के लिए, मनोवैज्ञानिक न केवल मनुष्यों और जानवरों के कार्यों का अध्ययन करते हैं, बल्कि उनके शरीर और मस्तिष्क में घटित होने वाली प्रक्रियाओं का भी अध्ययन करते हैं।

 यदि आप मनोविज्ञान विषय का अध्ययन करेंगे तो आप पाएंगी की इस विषय के अध्ययन द्वारा आप स्वयं के, दूसरों के मानशिक , शारीरिक विशेषताओं को और उनके द्वारा किये जाने वाले व्यवहार आदि को भली भांति समझ सकते हैं 

अक्सर लोगों के मन में यह विचार आते हैं की लोग जिस तरह का व्यवहार करते हैं वैसा वे क्यों करते हैं। लोग प्रसन्न या अधिकतर अप्रसन्न क्यों होते हैं? यदि वे अपने जीवन में खुश रहना चाहते  हैं तो इसके लिए उनको अपने अन्दर एवं अपने वाह्य वातावरण  में क्या और कैसे  परिवर्तन लाने चाहिए। सभी ज्ञान की तरह, मनोवैज्ञानिक का ज्ञान भी मानव कल्याण के लिए बहुत योगदान देना चाहता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आधुनिक मनोविज्ञान अस्पष्ट एवं सूक्ष्मस्तर बातों  जैसे चेतना, शोरगुल के मध्य  पर ध्यान केंद्रित करने आदि बातों का भी अध्ययन करता है। मनोविज्ञान इस बात का दावा नहीं कर सकता कि वह  सभी जटिल प्रश्नों का उत्तर दे सकता है। परंतु इसने हमारी समझ को बढ़ाया है और इन बातों का अर्थ हम समझने लगे हैं।

    इस विद्याशाखा की सबसे अधिक आकर्षित करने वाली बात यह है कि, मनोविज्ञान के अध्ययन द्वारा मनुष्य स्वयं अपने और दुसरों के बारे में एक अच्छी समझ विकसित कर लेता है, जो उसके जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण है l

परिभाषा 

                   मनोविज्ञान को कई विद्वानो द्वारा परिभाषित किया गया है जिसमें से कुछ विद्वान इस प्रकार हैं l

  • वाटसन के अनुसार– मनोविज्ञान, व्यवहार का निश्चित या शुद्ध विज्ञान है।
  • मैक्डूगल के अनुसार– मनोविज्ञान, आचरण एवं व्यवहार का यथार्थ विज्ञान है
  • वुडवर्थ के अनुसार– मनोविज्ञान, वातावरण के सम्पर्क में होने वाले मानव व्यवहारों का विज्ञान है।
  • क्रो एण्ड क्रो के अनुसार– मनोविज्ञान मानव–व्यवहार और मानव सम्बन्धों का अध्ययन है।
  • बोरिंग के अनुसार– मनोविज्ञान मानव प्रकृति का अध्ययन है।
  • स्किनर के अनुसार– मनोविज्ञान, व्यवहार और अनुभव का विज्ञान है।
  • मन के अनुसार– आधुनिक मनोविज्ञान का सम्बन्ध व्यवहार की वैज्ञानिक खोज से है।
  • गैरिसन व अन्य के अनुसार– मनोविज्ञान का सम्बन्ध प्रत्यक्ष मानव – व्यवहार से है।
  • गार्डनर मर्फी के अनुसार– मनोविज्ञान वह विज्ञान है, जो जीवित व्यक्तियों का उनके वातावरण के प्रति अनुक्रियाओं का अध्ययन करता है।
  • ब्राउन के अनुसार– शिक्षा के द्वारा मानव व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है तथा मानव व्यवहार का अध्ययन ही मनोविज्ञान कहलाता है।
  • बलविंदर के अनुसार– किसी मानव मस्तिष्क में किसी जीव या प्राणी के संदर्भ में आए विचारों का मानव मस्तिष्क द्वारा निकाले गए निष्कर्षों को परिभाषित करना मनोविज्ञान कहलाता हैं

अर्थ 

     किसी भी ज्ञान-विधा को कुछ कारणों से परिभाषित करना कठिन होता है। इसका कारण यहाँ है की यह निरंतर  विकसित होता रहता है। जैसे-जैसे नए शोध, नए तथ्य और नई व्याख्याएँ सामने आती हैं, वैसे-वैसे उस विषय का स्वरूप भी विस्तृत होता जाता है। मनोविज्ञान (Psychology) के संदर्भ में यह बात और अधिक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। मनोविज्ञान (Psychology) शब्द दो ग्रीक शब्दों साइकी (Psyche) अर्थात आत्मा और लॉगोस (Logos) अर्थात विज्ञान अथवा एक विषय के अध्ययन से बना है। अतः मनोविज्ञान आत्मा अथवा मन का अध्ययन था। परंतु तब से इसका केंद्रीय बिंदु बहुत अधिक बदल चुका है तथा यह अपने को एक वैज्ञानिक विद्याशाखा के रूप में स्थापित कर चुका है जो मानव अनुभव, मनोवैज्ञानिक गुणों  एवं व्यवहार में निहित प्रक्रियाओं की विवेचना करता है। 

किसी भी विद्याशाखा की परिभाषा इस बात पर निर्भर करती है कि वह किन बातों का तथा कैसे अथवा किन विधियों का उपयोग करके अध्ययन करती करती है। इसी बात को ध्यान रखते हुए, औपचारिक रूप से मनोविज्ञान को मानसिक प्रक्रियाओं, अनुभवों एवं विभिन्न संदर्भों में व्यवहारों का अध्ययन करने वाले विज्ञान के रूप मे परिभाषित किया जाता है । 

                मनोविज्ञान वह विद्या है जिसके द्वारा  प्राणी (मनुष्य, पशु आदि) के मानसिक प्रक्रियाओं, तथा व्यवहार (व्यक्त व अव्यक्त ) का एक क्रमबद्ध तथा वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता  है। व्यवहार में हमारी सभी बाहरी या प्रत्यक्ष क्रियाएँ और प्रतिक्रियाएँ शामिल हैं, जैसे बोलना, चेहरे के भाव और गति। मानसिक प्रक्रियाएँ हमारे मन की सभी आंतरिक, गुप्त (छिपी हुई) गतिविधियों को संदर्भित करती हैं, जैसे- सोचना, महसूस करना, याद रखना, प्रत्यक्षण, स्मृति, बुद्धि, चिंतन, भाव, अवधान(ध्यान), संवेदना, और अधिगम(सिखना) आदि l 

       मनोविज्ञान व्यवहार और मानसिक क्रियाओं का वातावरण की घटनाओं के साथ उनका संबंध जोड़कर अध्ययन करता है। इस परिप्रेक्ष्य में मनोविज्ञान को व्यवहार एवं मानसिक प्रक्रियाओं के अध्ययन का विज्ञान कहा गया है। ‘व्यवहार’ में मानव व्यवहार तथा पशु व्यवहार दोनों ही सम्मिलित होते हैं।

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