जब हम किसी बात को जानने,समझने या उसका स्मरण करने के लिए चिंतन करते हैं या समस्या का समाधान करते हैं तो हम मानसिक प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं। मस्तिष्क की क्रियाओं के स्तर पर ये मानसिक प्रक्रियाएँ परिलक्षित होती हैं। मनोविज्ञान में मानसिक प्रक्रियाएं मस्तिष्क (mind) के अन्दर घटित होने वालि वो संज्ञानात्मक प्रक्रियाएं होती हैं, जिसमें संवेदना तथा प्रत्यक्षण जैसी मुलभुत प्रक्रियाओं के साथ-साथ सोच, यादाश्त, संवेग, स्मृति, अभिप्रेरणा, सीखना, समस्या समाधान , डिसीजन मेकिंग और भाषा जैसे जटिल क्रियाएँ तक सब कुछ शामिल होता है l ये मानसिक क्रियाएं एवं प्रक्रियाएं सभी व्यवहार, क्रियाएं और दुनिया की समझ को प्रभावित करते हैं।
हम मानसिक क्रियाओं एवं मस्तिष्क की क्रियाओं को एक नहीं मान सकते हैं, यद्यपि वे एक दूसरे पर आश्रित होती हैं। ये एक दूसरे से आच्छादित लगती हैं परंतु वे समरूप नहीं होती हैं। मस्तिष्क से भिन्न मन की कोई भौतिक संरचना अथवा अवस्थिति नहीं होती है। मन का आविर्भाव एवं विकास होता है। ऐसा तब होता है जब इस संसार में हमारी अंतःक्रियाएँ एवं अनुभव एक व्यवस्था के रूप में गतिमान होकर संगठित होते हैं जो विविध प्रकार की मानसिक प्रक्रियाओं के घटित होने के लिए उत्तरदायी होते हैं। मस्तिष्क की क्रियाएँ इस बात का संकेत देती हैं कि हमारा मन कैसे कार्य करता है। परंतु हमारे अपने अनुभव एवं मानसिक प्रक्रियाओं की चेतना कोशिकीय अथवा मस्तिष्क की क्रियाओं से बहुत अधिक होती है। जब हम सोते हैं तब भी हमारी मानसिक क्रियाएँ चलती रहती हैं। हम स्वप्न देखते हैं और सूचनाएँ भी ग्रहण करते हैं, जैसे दरवाजे का खटखटाया जाना हम सोते समय भी जान जाते हैं। कुछ मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि हम सोते समय सीखते और स्मरण भी करते हैं। मनोवैज्ञानिक स्मरण करने, सीखने, जानने, प्रत्यक्षण करने एवं अनुभूतियों में रुचि लेते हैं। वे इन प्रक्रियाओं का अध्ययन यह जानने के लिए करते हैं कि हमारा मन कैसे कार्य करता है तथा हमारी सहायता करने के लिए करते हैं जिससे हम अपनी मानसिक क्षमताओं के उपयोग एवं उसके अनुप्रयोग में सुधार कर सकें।